भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
अनिल त्रिपाठी / परिचय
Kavita Kosh से
| अनिल त्रिपाठी की रचनाएँ |
वे कविताएं भी खूब लिखते हैं और उनका एक कविता संकलन `एक स्त्री का रोज़नामचा´ नाम से छपा और चर्चित हुआ है। अनिल की कविताओं में साफ़ दिखता है कि उन्होंने त्रिलोचन के ``कविता में वाक्य पूरा करने´´ के निर्णय को पूरी तरह अपनाया है। वे समकालीन हिंदी साहित्य की दुनिया का एक सुपरिचित नाम हैं। इस समय बुलन्दशहर ज़िले के एक छोटे कस्बे में हिंदी के प्राध्यापक हैं।