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अब हम हर के दास कहाके / संत जूड़ीराम

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अब हम हर के दास कहाके।
हरहिं छोड़ जांचे नहिं ओरों नाम कल्प तरू ताके।
दाता धनी वनी सबही विध सब पूजी अवलोके।
झाबर झीला मत नहिं मनुवां गंग तरंगन हांके।
कौन सहे उपहास जगत की मद हुंकार भमाके।
अब तो भये गुलाम राम के कहियत टेर सुनाके।
दुरमत कहें बनाई दुरमती है दुविदावर जाके।
जुड़ी पटौ लिखौ रघुवर को और देव नहिं लाके।