Last modified on 25 नवम्बर 2009, at 19:36

अल्मिया / फ़राज़


अल्मिया[1]

किस तमन्ना [2]से ये चाहा था कि इक रोज़ तुझे
साथ अपने लिए उस शहर को जाऊँगा जिसे
मुझको छोड़े हुए,भूले हुए इक उम्र[3]हुई

हाय वो शहर कि जो मेरा वतन है फिर भी
उसकी मानूस[4]फ़ज़ाओं [5]से रहा बेग़ाना[6]
मेरा दिल मेरे ख़्यालों[7]की तरह दीवाना[8]


आज हालात का ये तंज़े-जिगरसोज़ [9]तो देख
तू मिरे शह्र के इक हुजल-ए-ज़र्रीं[10] में मकीं[11]
और मैं परदेस में जाँदाद-ए-यक-नाने-जवीं[12]
 

शब्दार्थ
  1. त्रासदी
  2. कामना,दिल की गहराइयों से
  3. लंबा समय
  4. परिचित
  5. हवाओं (वातावरण)
  6. अंजान
  7. विचारों
  8. पागल
  9. सीने को छलनी कर देने वाला उलाहना
  10. सोने (स्वर्ण) की सेज
  11. निवासी
  12. जौ की एक रोटी को तरसता