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अविकसित / स्वाति मेलकानी

कपड़ों और माँस की
कई तहों के नीचे
कैसा रहा होगा इन्सान
असलियत में।
चेहरा, नैन-नक्श
कितने अलग दिखते होगें।
लटके गालों में
धँस चुकी आँखें
शायद
कुछ ज्यादा बड़ी रही होंगी
और
उसी अनुपात में
बड़े रहे होंगे
दिल और दिमाग।
सुना है डाइनासोर बहुत बड़े होते थे
शुरूआती कम्प्यूटर
और
मोबाइल भी
काफी बड़े थे
पर
धीरे-धीरे
छोटे हो गये
वरना अविकसित रह जाते
बड़े दिल
और दिमाग वाले
मनुष्य की तरह।