Last modified on 16 जनवरी 2009, at 17:55

आँखें देखकर / गोरख पाण्डेय



ये आँखें हैं तुम्हारी
तकलीफ़ का उमड़ता हुआ समुन्दर
इस दुनिया को
जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिये.