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आँख-मिचौली / प्रतिमा पांडेय

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आँख-मिचौली खेलें मम्मी
रुको जरा, छिप जाऊँ मम्मी!

बनो चोर तुम, मैं छिप जाऊँ
तुम ढूँढ़ो मैं हाथ ना आऊँ
हार मानकर जब तुम बैठो,
तभी अचानक मैं आ जाऊँ!
गोदी में तेरी आकर मैं,
खिल-खिल हँसूँ-हँसाऊँ मम्मी!

मम्मी फिर मैं चोर बनूँगा,
छिपना आप पलँग के नीचे,
पकडँू जब मैं पीछे-पीछे।
खेल-कूद करके यूँ ही मैं,
तुमको भी बहलाऊँ मम्मी!