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आई गेन ऋतु बौड़ी दॉई जनो फेरो / गढ़वाली

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

आई गेन ऋतु बौड़ी[1] दॉई जनो फेरो[2], झुमैलो
ऊबा[3] देसी ऊबा जाला, ऊँदा[4] देसी ऊँदा, झुमैलो
लम्बी-लम्बी पुंगड् यों[5] मां, रअ् रअ् शब्द होलो, झुमैलो
गेहूँ की जौ की सारी, पिंगली[6] होई गैने, झुमैलो
गाला गीत बसन्ती, गौं का छोरा[7] छोरी, झुमैलो
डाँडी काँठी गुँजी ग्येन, ग्वैरू[8] को गितूना, झुमैलो
छोटी नौनी-नौनी, मिलि देल्यू[9] फूल चढ़ाला झुमैलो:
जौं का माई रला, देला टालुकी[10] अंगूड़ी[11], झुमैलो
मैतु[12] बैण्युं कु अप्णी, बोलौला चेत मैना, झुमैलो।

शब्दार्थ
  1. लौटना
  2. फसल मोड़ते समय बैलों के चक्कर
  3. ऊपर
  4. नीचे
  5. खेत
  6. पीली
  7. लड़का
  8. चरवाहा
  9. देहली
  10. चुनरिया
  11. अगर
  12. मायके