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"आज भी है शेष है / कविता भट्ट" के अवतरणों में अंतर

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ध्यान नहीं, मुझे देखना दावा था,
 
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या  उसका  वचन केवल छलावा था।
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मेरे थे अपने ही भोलेपन,  
 
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वह किसी और में  था मगन।
 
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किन्तु आज भी है शेष है,  
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किन्तु आज भी मुझमे शेष है,  
 
वही निष्ठा- प्रेम विशेष है।
 
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मेरे भीतर भी  ईश्वर जीवित है,  
 
मेरे भीतर भी  ईश्वर जीवित है,  
यह मिथ्या नहीं बल्कि सुनिश्चित है।  
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शत्रुता अच्छी मित्रों ने निभाई
 
शत्रुता अच्छी मित्रों ने निभाई

02:50, 17 अगस्त 2019 के समय का अवतरण

उसकी चपल आँखों की गति,
मेरे लिए प्रश्न है आज भी।
 
ध्यान नहीं, मुझे देखना दावा था,
या उसका वचन केवल छलावा था।

मेरे थे अपने ही भोलेपन,
वह किसी और में था मगन।
 
किन्तु आज भी मुझमे शेष है,
वही निष्ठा- प्रेम विशेष है।
 
टूटेगा कभी तो उसका भरम,
विजयी होगा मेरा ही धरम।
 
मेरे भीतर भी ईश्वर जीवित है,
यह मिथ्या नहीं ,बल्कि सुनिश्चित है।
 
शत्रुता अच्छी मित्रों ने निभाई
कटार लिये खड़ी मेरी परछाई।
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