भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"आदमी है ठीकरा / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार= रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' |संग...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
 
 
पंक्ति 6: पंक्ति 6:
 
[[Category: ताँका]]
 
[[Category: ताँका]]
 
<poem>
 
<poem>
32
+
33
 
उदासियाँ क्यों?
 
उदासियाँ क्यों?
 
दिल था दरपन
 
दिल था दरपन
पंक्ति 12: पंक्ति 12:
 
चोटें अनवरत
 
चोटें अनवरत
 
तब टूटना पड़ा।
 
तब टूटना पड़ा।
33
+
34
 
सुख-कामना
 
सुख-कामना
 
की थी सबके लिए ,
 
की थी सबके लिए ,
पंक्ति 18: पंक्ति 18:
 
दु:ख सबके सारे
 
दु:ख सबके सारे
 
वे ही पास हमारे।
 
वे ही पास हमारे।
34
+
35
 
समय क्रूर
 
समय क्रूर
 
करता चूर-चूर
 
करता चूर-चूर
पंक्ति 24: पंक्ति 24:
 
आदमी है ठीकरा
 
आदमी है ठीकरा
 
कौड़ी के मोल बिके।  
 
कौड़ी के मोल बिके।  
 
 
 
  
 
</poem>
 
</poem>

08:15, 13 जून 2019 के समय का अवतरण

33
उदासियाँ क्यों?
दिल था दरपन
पड़ीं हज़ारों
चोटें अनवरत
तब टूटना पड़ा।
34
सुख-कामना
की थी सबके लिए ,
मैंने माँगे थे-
दु:ख सबके सारे
वे ही पास हमारे।
35
समय क्रूर
करता चूर-चूर
सारे सपने
आदमी है ठीकरा
कौड़ी के मोल बिके।