भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आश्विन मास, शरद ऋतु शोभन / हनुमानप्रसाद पोद्दार

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 01:00, 17 जनवरी 2014 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=हनुमानप्रसाद पोद्दार |अनुवादक= |स...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आश्‌िवन मास, शरद ऋतु शोभन, शीतल शुभ्र चाँदनी रात।
कालिन्दी-जल निर्मल मनहर, मन्द सुगन्ध रहा बह वात॥
रत्न-सुदीप्त रुचिर नौकापर रहे विराजित श्यामा-श्याम।
करते मधुर विनोद परस्पर नौ-विलास-रत अति अभिराम॥
श्रीमति बोली-’सुनो प्राणधन ! तुम मुरलीकी छेड़ो तान।
सुन्दर-सुमधुर स्वर-लहरीमें मुझे सुना‌ओ रसमय गान॥
मैं खे लूँगी नाव, प्राण खेलेंगे रसमय खेल महान।
नयन-मधुप रसमा रहेंगे कर मुख-सरसीरुह-रस पान’॥
यों कह खेने लगी तरी कर दृष्टि अचचल पियकी ओर।
दृष्टि जमा श्यामा-मुख मुरली लगे बजाने नन्द-किशोर॥