भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आसन्न प्रसवा के लिये / उर्मिल सत्यभूषण

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ५ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 23:46, 20 अक्टूबर 2019 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=उर्मिल सत्यभूषण |अनुवादक= |संग्रह...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तिमिर को भेद कर
मुस्का रहा है एक तारा
तुम्हारी गोद में उंडेलता
आलोक-सारा
तुम्हारी देह का सौरभ
तुम्हें महका रहा है
कहीं पर खिल रहा है
प्रेम का प्रतीक प्यारा
तुम्हारी वेदना के मेघ
किरणों से सजे हैं
कि झंझा के झकोरों में
बजा है झुनझुना प्यारा
तुम्हारे द्वार पर वात्सल्य
है चुपचाप ही आया
उषा ने चूम कर मुखड़ा
रवि का थाल है वारा।