भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"इक जगह जम्अ कर लो सारे ग़म /राज़िक़ अंसारी" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=राज़िक़ अंसारी }} {{KKCatGhazal}} <poem>इक जगह ज...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
 
(कोई अंतर नहीं)

07:06, 14 जून 2019 के समय का अवतरण

इक जगह जम्अ कर लो सारे ग़म
आ के फिर देखना हमारे ग़म

तू है मेहमान बिन बुलाया हुआ
कौन कहता है तुझ से आ, रे ग़म

भूल जाएगा मसख़री करना
तूने देखा नहीं है प्यारे, ग़म

मेरे दिल में क़याम है वरना
जा के फिर शब कहाँ गुज़ारे ग़म

होता ख़ुशियों का दाख़िला कैसे
पांव इस तरह थे पसारे ग़म

जाने कितनों की जान ली तूने
किस में हिम्मत है तुझ को मारे ग़म

हम खिलाड़ी बहुत पुराने हैं
वरना बाज़ी किसी से हारे ग़म