भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"इतनी चाह- / कृष्णा वर्मा" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार= कृष्णा वर्मा |संग्रह= }} Category:ताँ...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
 
 
पंक्ति 6: पंक्ति 6:
 
[[Category:ताँका]]
 
[[Category:ताँका]]
 
<poem>
 
<poem>
 
+
1
 
+
तरसा मन
 
+
करूँ तुमसे बातें
 
+
रूठा क्यूँ रिश्ता
 +
दहके दिन मेरे
 +
जलती रहीं रातें।
 +
2
 +
दे देते यदि
 +
अँजुरी भर प्यार
 +
जी लेते हम
 +
पतझर ऋतु में
 +
बनकर बहार।
 +
3
 +
सिर्फ अपना
 +
प्यार तो समर्पण
 +
ढूँढे क्यों ख़ता
 +
बन जा तू क़ाबिल
 +
बेकार ना आज़मा।
 +
4
 +
यूँ ना तड़पा
 +
और चुप रहके
 +
न पीड़ा बढ़ा
 +
कह ग़म अपने
 +
हर लूँ मैं अँधेरे।
 +
5
 +
हुआ बेरंग
 +
जीवन बिन तेरे
 +
टूटी है आस
 +
पनघट पे बैठी
 +
रही प्यासी ही प्यास।
 +
6
 +
इतनी  चाह-
 +
फूलें -फलें संबंध
 +
सच्ची हो वफ़ा
 +
आए नहीं दरार
 +
पलता रहे प्यार।
 +
7
 +
तुम क्या मिले
 +
बने शूल राहों के
 +
फूलों के गुंचे
 +
राहें हुईं आसान
 +
सुख मेहरबान।
  
 
</poem>
 
</poem>

05:11, 29 जुलाई 2019 के समय का अवतरण

1
तरसा मन
करूँ तुमसे बातें
रूठा क्यूँ रिश्ता
दहके दिन मेरे
जलती रहीं रातें।
2
दे देते यदि
अँजुरी भर प्यार
जी लेते हम
पतझर ऋतु में
बनकर बहार।
3
सिर्फ अपना
प्यार तो समर्पण
ढूँढे क्यों ख़ता
बन जा तू क़ाबिल
बेकार ना आज़मा।
4
यूँ ना तड़पा
और चुप रहके
न पीड़ा बढ़ा
कह ग़म अपने
हर लूँ मैं अँधेरे।
5
हुआ बेरंग
जीवन बिन तेरे
टूटी है आस
पनघट पे बैठी
रही प्यासी ही प्यास।
6
इतनी चाह-
फूलें -फलें संबंध
सच्ची हो वफ़ा
आए नहीं दरार
पलता रहे प्यार।
7
तुम क्या मिले
बने शूल राहों के
फूलों के गुंचे
राहें हुईं आसान
सुख मेहरबान।