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ई तो मगध हे / मुनेश्वर ‘शमन’

ई तो मगध हे, मट्टी एक्कर महमह हे चन्नन हे।
पुजाल-पावन बैड मनभावन गरब भरल जन-जन हे।

झाड़ी-झरना परबत-जंगल खुब्बे उरबर समतल
ताल-तलइया उपवन-बगिया नदियन के धुन कल-कल
कुदरत के सोभा से सोभ रहल एक्कर कन-कन हे।

हे गोआह इतिहासो कि हे विरासत गौरवशाली।
बल-वैभव के आन-बान के धरती आभावाली।
नालन्दा के महादान के, कायल सकल भुवन हे।
 
करम-धरम हित राम-स्याम ई धराधाम पर अइलन।
राजकुँवर-सिद्धार्थ हियएँ आ गौतम बुद्ध कहइलन।
महावीर के ग्यान-ध्यान से सफल जनम-जीवन हे।

कते-कते तीरथ असथल ई वसुधा पर बिखरल हे।
तप-तप के संघर्ष में एक्कर तेज आउर निखरल हे।
कंठ-कंठ में सामिल महिमा के गायन हे।