भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"उदास नैन / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
 
पंक्ति 39: पंक्ति 39:
 
कुछ तो दे दो
 
कुछ तो दे दो
 
दारुण मृत्यु सही
 
दारुण मृत्यु सही
जीवन भार
+
जीवन- भार
 
अब ढोया न जाए
 
अब ढोया न जाए
अब रोया न जाए।
+
'''अब रोया न जाए।'''
 
32
 
32
 
'''किसे दिखाते'''
 
'''किसे दिखाते'''

06:32, 11 मई 2019 के समय का अवतरण

26
आत्मा में बसे
भ्रम यह तुम्हारा
ध्यान से देखो !
आत्मा हो तुम मेरी
या रीप्रिंट आत्मा का।
27
डूबी थी नौका
भागे कुछ पा मौका
घोर अँधेरा
कोई न रहा साथ
थामा तुमने हाथ।
28
समझें लोग
नफ़रत की भाषा
दो ही पल में
हुआ मोतियाबिंद
प्रेम न दिखे -सूझे।
29
उदास नैन
छप गए मन में
रोज मैं बाँचूँ
सौ -सौ जिनके अर्थ
पढ़ें मन की आँखें।
30
अकेलापन
टीसता पल पल
प्राण विकल
सुनने को तरसें
रोम- रोम कलपें
31
कुछ तो दे दो
दारुण मृत्यु सही
जीवन- भार
अब ढोया न जाए
अब रोया न जाए।
32
किसे दिखाते
निर्मल मन -दर्पण
निपट अंधे
करें रोज़ फैसला
हमको यही गिला।