भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

एक्लै एक्लै उदास उदास छु म / भीमदर्शन रोका

Kavita Kosh से
Sirjanbindu (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 15:50, 23 जुलाई 2017 का अवतरण (' {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार= भीमदर्शन रोका |अनुवादक= |संग्रह=घ...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


एक्लै एक्लै उदास उदास छु म
घाम डुबी तारा नउदाएको आकाश हुँ म
हिजो जहाँ आई बसेथिन् तिनी
त्यही उजडिसकेको बास हुँ म

एक्लै एक्लै उदास उदास छु म ।

कोही नदी किनार हुँ म
सधैँ पर्खिरहने प्यार हुँ म
कतैदेखि टाढा भएपनि
कतैदेखि बिल्कुल पास छु म

एकलै एक्लै उदास उदास छु म ।