भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

एक दुनिया रचें / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 09:23, 7 सितम्बर 2011 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

एक दुनिया रचें आओ हम प्यार की ।
जिसमें ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ हों संसार की ।

एक धरती ने हमको दिया है जनम,
एक धरती के बेटे हैंहम, मान लें ।
अजनबी हों भले हाथ अपने मगर
गर्मियाँ एक-दूजे की पहचान लें ।
तोड़ डालें ये दीवारें बेकार की
एक दुनिया रचें आओ हम प्यार की ।

धूप गोरी है क्यों, रात काली है क्यों
इन सवालों का कुछ आज मतलब नहीं,
बाँट दें जो बिना बात इंसान को
उन ख़यालों का कुछ आज मतलब नहीं,
जोड़ कर हर कड़ी टूटते तार की,
एक दुनिया रचें आओ हम प्यार की ।