भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

कलरव किसको नहीं सुहाता / सुमित्रानंदन पंत

Kavita Kosh से
Dkspoet (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 11:50, 13 मई 2010 का अवतरण ("कलरव किसको नहीं सुहाता / सुमित्रानंदन पंत" सुरक्षित कर दिया ([edit=sysop] (indefinite) [move=sysop] (indefinite)))

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कलरव किसको नहीं सुहाता?
कौन नहीं इसको अपनाता?
यह शैशव का सरल हास है,
सहसा उर से है आ जाता!

कलरव किसको नहीं सुहाता?
कौन नहीं इसको अपनाता?
यह ऊषा का नव-विकास है,
जो रज को है रजत बनाता!

कलरव किसको नहीं सुहाता?
कौन नहीं इसको अपनाता?
यह लघु लहरों का विलास है,
कलानाथ जिसमें खिंच आता!

रचनाकाल: १९२२