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कहियो नियरा करेजा के आ जइत हो / रामरक्षा मिश्र विमल

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कहियो नियरा करेजा के आ जइत हो
तान बंशी के बिरही सुना जइत जो

मन पपिहरा तपित आजु काहें भला
पी नयन के सेवाती अघा जइत हो

बाढ़ि काहेंके आइत फफनिके हिया
जिंदगी के किनारा मिला जइत हो

आजु पगली कहइतीं ना गउँवा-नगर
बिंब आपन नयन से हटा जइत हो

कामना के बली देइ दिहतीं 'विमल'
बेरि एको सुरतिया देखा जइत हो