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"केतना होवे हे तबाही / सिलसिला / रणजीत दुधु" के अवतरणों में अंतर

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23:17, 14 जून 2019 का अवतरण

बनके परदेसी रोज करऽ ही आवा जाही,
की कहियो की कतना होवे हे तबाही।

भोरे उठते करऽ ही इसकुल के तइयारी
सानऽ ही आँटा आउ काटऽ ही तरकारी
हाली-हाली खा ही नय पूरा चिबाही,
की कहियो की कतना होवे हे तबाही।

जवानों से जादे अब हो गेलूँ फरहर,
गाड़ी के पकड़ेले दउड़ऽ ही धड़फर,
नय सीट मिलला पर पीछे लटक जा ही,
की कहियो की कतना होवे हे तबाही।

सीटो मिलला पर नय हको छुटकारा,
ठेलठाल के मयडम कर दे हथ किनारा,
देवघर मंदिर जयसन आगे पीछे ठेला ही,
की कहियो की कतना होवे हे तबाही।

जे हका लंबा ऊपर धरऽ हथ रॉड
हमरा तो हो जा हको तेरहो निनान,
कभी काँख तर कभी आगे पीछे से चपा ही
की कहियो की कतना होवे हे तबाही।

चिन्ह गेलो सभे ड्राइवर कंडेक्टर खलासी
घिच ठेल के चढ़ा दे हे, दे ही साबासी।
दुरघटना होवे से नय तनिको डेराही,
की कहियो की कतना होवे हे तबाही।