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केसरिया बन्ना बागों में आया रे / हिन्दी लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

केसरिया बन्ना बागों में आया रे, केसरिया बन्ना बागों में आया रे
आवो री सज धज कर आवो री,
सखियन सब आवो री, माला पहनावो री
केसरिया बन्ना बागों में आया रे॥

ये मेरे हाथ फूलों की डाली,ये मेरे हाथ फूलों की डाली
मैं जो मालन बन कर आयी, बागों में एसी छायी
केसरिया बन्ना बागों में आया रे

ये मेरे हाथ चौमुखी दियना,ये मेरे हाथ चौमुखी दियना
मैं तो ज्योती बन कर आयी, महलों में एसी छायी
केसरिया बन्ना बागों में आया रे

ये मेरे हाथ पानों के बीडे,ये मेरे हाथ पानों के बीडे,
मैं जो लाली बन कर आयी, रंगों में एसी छायी
केसरिया बन्ना बागों में आया रे,
केसरिया बन्ना बागों में आया रे,

आवो री सज धज कर आवो री,
सखियन सब आवो री, माला पहनावो री
केसरिया बन्ना बागों में आया रे॥