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कोई तारा फलक से जब टूटा / सबा सीकरी

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कोई तारा फलक से जब टूटा
एक चश्मा ज़मीन से फूटा

मैने फेंका था जिसको दुश्मन पर
उसी पत्थर से मेरा सर फूटा

अपनी नज़रों से यूँ गिरा हूँ सबा
जैसे हाथों से आसमाँ छूटा