भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कोई हम-दर्द हम-दम न यगाना अपना / 'ममनून' निज़ामुद्दीन

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता २ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 08:34, 1 जुलाई 2013 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार='ममनून' निज़ामुद्दीन |संग्रह= }} {{KKCatG...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कोई हम-दर्द हम-दम न यगाना अपना
रू-ब-रू किस के कहें हम ये फ़साना अपना

न किसू जैब के हैं फूल न दामन के हैं ख़ार
किस लिए था चमन-ए-दहर में आना अपना

फ़ाएदा क्या जो हुए शैख़-ए-हरम राहिब-ए-दैर
न हुआ दिल में किसी के जो ठिकाना अपना

है हज़ारों दिल-ए-पुर-ख़ूँ को यहाँ पेच पे पेच
देखियों तुर्रा-ए-मुश्कीं न मिलाना अपना