भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"खुशियों के जुगनू / कृष्णा वर्मा" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(' 1 कैसा सितम किया आज वक़्त ने फिरें ढूँढते दिल की खु...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
 
 
पंक्ति 1: पंक्ति 1:
 
+
{{KKGlobal}}
 
+
{{KKRachna
 
+
|रचनाकार= कृष्णा वर्मा   
 +
|संग्रह= 
 +
}}
 +
[[Category:ताँका]]
 +
<poem>
  
 
1
 
1

04:44, 29 जुलाई 2019 के समय का अवतरण


1
कैसा सितम
किया आज वक़्त ने
फिरें ढूँढते
दिल की खुशियों की
हम सब वजह।
2
रोतीं चाहतें
दिलों के दरम्यान
कौन दे रहा
फासलों का पहरा
तड़पते किनारे।
3
कैसे बुझाए
खुशियों के जुगनू
उदासियों की
घिर आईं घटाएँ
मरे बाँसुरी सुर।
4
मन बंजारा
बेचैन भटकता
फिरे आवारा
खोजे तेरी प्रीत को
मिल जाए दोबारा।
5
जेठ की धूप
ठहरी जीवन में
देती आघात
ढूँढ रही ज़िंदगी
बरगद की छाँव।
6
लगी माँगने
मुसकानों का कर्ज़
क्यों ज़िंदगानी
छीन कर वसंत
क्यों दे गई वीरानी।