भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

खेलत खेल खिलाड़न माया / संत जूड़ीराम

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 00:30, 29 जुलाई 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=संत जूड़ीराम |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KK...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

खेलत खेल खिलाड़न माया।
जोगी जती तपी व्रत धारी सुरनर मुनि को पकर नचाया।
दूती रूप फिरत जग जीती कर्म बिवूचित काया।
ग्रहं मंदर धन धाम जहाला खट दर्शन पाखंड दिखाया।
जूड़ीराम छलत वा सबको समझ न परे रूप बिनु छाया।