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गइया के ओरहन के कुछ अंश / कन्हैया लाल पण्डित

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गइया रोअत बाड़ी
अँखियन लोर ढारी
कब करबऽ हमरो
गोहार हो कन्हइया॥
हमरे करनवाँ तूँ
काँटे-कुस बनवाँ में
पाछा पाछा रहऽ
छिछियात हो कन्हइया॥
काड़ि दीं मचनियाँ
बिगाड़ि दीं किसनियाँ
कि तबहूँ ना छूवलऽ
छकुनियाँ कन्हइया॥
पगुरी होखत बंद
मुरली भूलाले छन्द
बैदा बोलवऽ
छने-छन हो कन्हइया॥
गइया त मिट जाई
तूँ हू ना रहबऽ भाई
गइया ना त कहवाँ
गोपाल हो कन्हइया॥
हमरे गोरस धार
जनमल गीता के सार
अरजुन लीहलऽ
उबार हो कन्हइया॥
आई के देखऽ हाल
गइया के लाल लाल
खुनवाँ से लथ-पथ
छाल हो कन्हइया॥
करत बानी आह-आह
नइखे कहीं चारागाह
केकरा बा हमरा के
दाह हो कन्हइया॥
नइखे परहेज अब
ईसाई-मिया-हिन्दू सब
गइया के खोभे ...
खभ-खभ हो कन्हइया॥
मोरा सुनि के विलाप
नाहिं अइबऽ यदुनाथ
त गइया सराप धरऽ
माथ हो कन्हइया॥
जदुकुल जरी-मरी
रघुकुल प बीपत परी
हिन्दू कुल धसीहें
पताल हो कन्हइया॥