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"गर्म हवाएँ / कृष्णा वर्मा" के अवतरणों में अंतर

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घर हो गए सराय
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मायावी है समय छली
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सूझ-बूझ न एक चली
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ख़ाक हुए दिन आने वाले
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आदिम तम घिरा गली-गली
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चिंता का चिंतन रहे चलता
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आशाएं बेआस हो गईं
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कौन सुने अब किसको रोएं
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रात-दिवस बोझिल मन ढोएं
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शापित जीवन किया काल ने
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सिसक मरीं सब याचनाएँ।
  
 
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17:57, 14 जून 2019 के समय का अवतरण

कलयुग की काली छाया में
अंधी हुईं हवाएँ
रिश्ते-नाते शेष हो गए
रंग लहू के श्वेत हो गए
घर हो गए सराय
मायावी है समय छली
सूझ-बूझ न एक चली
ख़ाक हुए दिन आने वाले
आदिम तम घिरा गली-गली
घुला विषैला क़ायनात में
कोमल सांसें काठ हो गईं
चिंता का चिंतन रहे चलता
आशाएं बेआस हो गईं
कौन सुने अब किसको रोएं
रात-दिवस बोझिल मन ढोएं
शापित जीवन किया काल ने
सिसक मरीं सब याचनाएँ।