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गहिराइमा डुब्दै नडुब / नीर शाह

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गहिराइमा डुब्दै नडुब
डुबिसकेको छौ भने मोती नटिपी नफर्क

पन्छिएर हैन गहिरिएर जाऊ
जीवनलाई बुझ्ने रहर छ भने
कि त लुकेर बस मृत्यु कुरेर
समस्याहरुसँग डर छ भने

आउँछन् धेरै उकालो ओरालो
एकनास पाइला चाल्दै जाऊ
लक्ष्यमा पुग्न सजिलो हुँदैन
आतिएको मनलाई सम्हाल्दै जाऊ

शब्द - नीर शाह
स्वर - प्रकाश श्रेष्ठ