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गिल्ला गुजारी / पढ़ीस

द्याखउ-द्याखउ [1] दुदआ होरेउ,
युहु कउनु जबाना आयिगवा!
मुँहँ मूँदि-मूँदि अउँघान किह्यउ,
बिपतिन का बादरू छायि गवा।
कुछु आदि करउ उयि बातन की,
तुमका सब देउता कहति रहयिं।
अब हरहा गोरू हायि भयउ!
सबका युहु बाना भायि गवा।
जी तुमते सिट्टाचारू[2] सिखिनि,
तुमहे ते आउबु-आबु सिखिनि,
अब अड्ड लगायि का अयिंठतिं हयिँ,
युहु उलटा जबाना छायि गवा।
च्यातउ-च्यातउ, हउ बडे़ चतुर,
कस भूलि गयउ कयि धुकुर-पुकुर।
सिंघन के सिंहयि बने रहउ,
अब चक्करू चक्करू खायि गवा!

शब्दार्थ
  1. देखो-देखो
  2. शिष्टाचार, तहज़ीब