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चालो गजानंद (विवाह गीत) / मालवी

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रचनाकार: अज्ञात                 

लोकगीत

मालवी लोकगीत


चालो गजानंद जोसी क्याँ चालाँ
चालो गजानंद बजाजी क्याँ चालाँ
कई आछा-आछा लगनाँ लिखावाँ गजानंद
कोटारी गाद्धी पे नोबत बाजे।

नोबत बाजे इंदर गड़ गाजे
नोबत बाजे इंदर गड़ गाजे
तो झीणी-झीणी झालर बाजे गजानंद
कोटारी गादी पे नोबत बाजे।

चालो गाजानंद सोनी क्याँ चालाँ
चालो गजानंद माली क्याँ चालाँ
तो आछा-आछा गेणा मोलवाँ गजानंद
तो आछा-आछा सेवरा मोलावाँ गजानंद
कोटारी गादी पे नोबत बाजे।

इसी तरह शादी में दूल्हा-दुल्हन से जुड़ी चिज़ों के नाम लेते-लेते यह गीत लम्बा होता चला जाता है।

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