भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

चेतना / यानिस रित्सोस / अनिल जनविजय

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

शाम गिर रही
धीरे-धीरे सड़क पर
गर्म कपड़ों के उसे ढेर की तरह
जो ऊपर से सरक रहा है फर्श पर

शनिवार की शाम को
मज़दूरों की पाली बदल रही है

अँग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल जनविजय