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"छत्तीसगढ़ भजन / शिवरतन शांतर" के अवतरणों में अंतर

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22:59, 15 अगस्त 2019 के समय का अवतरण

जान ले संगी पांच चक्कर वट पार है
जनम मरन के चकरम ला निहार ले
जान ले संगी....

पांच चक्र मां सुध खेल गंवाये
मोर मोर कहि तें नित गाये
उधारी के काया माया, आत्मा संग विचार ले
जान ले संगी.....

पहिली चक्र मा जी धन बल पाये
दूसर चक्र हा कामला जगाये
तिसरे मोह चौथे अहम हे, पांचवे लेत रस लार हे,
जान ले संगी...

अरपन करदे तन के गुन धरम ला
साध ले मितवा मानुस के करम ला
गुरु सिखावन नोहर हे जोनी
परमात्मा सत हे जोहार ले ।