भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

छोड़ह आब आश सखे, स्वाती ! / धीरेन्द्र

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ३ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 02:06, 23 मई 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=धीरेन्द्र |संग्रह=करूणा भरल ई गीत...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

छोड़ह आब आश सखे, स्वाती !
ई मेघ ने बरिसत एखनि आब,
जीवन लेबेटा इष्ट एकर,
अपराध भेल किछु हमरासँ
छी भोगि रहल उत्पीढ़न तएँ।
नहि दोष कनेको देब ककरो
दोषी हमरेटा जीवन अछि।

अछि छिना गेल सभ हँसी आब,
खाली जरबेटा अछि बाँकी !

ओम्हर लागल अछि,
अरे ! आगि,
एम्हर व्याधा अछि,
घेरि रहल।

बाँचत पुनि जीव कोनाकें कहु ?
जरि रहल दीप, अछि स्नेह खतम,
खाली जरइत जाइछ, बाती !
छोड़ह आब आश सखे ! वाती !!