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जहीर कुरैशी
Kavita Kosh से
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जहीर कुरैशी | |
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जन्म: 05 अगस्त 1950
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| जन्म स्थान | चंदेरी, ज़िला गुना, मध्य प्रदेश, भारत |
| कुछ प्रमुख कृतियाँ | लेखनी के स्वप्न (1975), एक टुकड़ा धूप (1979), चांदनी का दु:ख (1986), समंदर ब्याहने आया नहीं है(1992), भीड़ में सबसे अलग (2003) पेड़ तन कर भी नहीं टूटा |
| विविध | |
| जीवनी | जहीर कुरैशी / परिचय |
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(ग़ज़ल संग्रह)
- भीड़ में सबसे अलग / जहीर कुरैशी
- समंदर ब्याहने आया नहीं है / जहीर कुरैशी
- चांदनी का दु:ख / जहीर कुरैशी
- पेड़ तन कर भी नहीं टूटा / जहीर कुरैशी
ग़ज़लें <sort order="asc" class="ul">
- वो हिम्मत करके पहले अपने अन्दर से निकलते हैं / जहीर कुरैशी
- वे शायरों की कलम बेज़ुबान कर देंगे / जहीर कुरैशी
- अँधेरे की सुरंगों से निकल कर / जहीर कुरैशी
- घर छिन गए तो सड़कों पे बेघर बदल गए / जहीर कुरैशी
- सब की आँखों में नीर छोड़ गए / जहीर कुरैशी
- हमारे भय पे पाबंदी लगाते हैं / जहीर कुरैशी
- उन्हें देखा गया खिलते कमल तक / जहीर कुरैशी
- दबंगों की अनैतिकता अलग है / जहीर कुरैशी
- आँखों की कोर का बडा हिस्सा तरल मिला / जहीर कुरैशी
- सपने अनेक थे तो मिले स्वप्न-फल अनेक / जहीर कुरैशी
- चित्रलिखित मुस्कान सजी है चेहरों पर / जहीर कुरैशी
- गगन तक मार करना आ गया है / जहीर कुरैशी
- मुस्कुराना भी एक चुम्बक है / जहीर कुरैशी
- फूल के बाद, फलना ज़रूरी लगा / जहीर कुरैशी
- नींद को आँखों में भर लेने की आदत बन गई / जहिर कुरैशी
- हमने शब्दों में उतरने की बहुत कोशिश की / जहीर कुरैशी
- उपन्यासों की बानी हो रही है / जहीर कुरैशी
- वो जिन लोगों को सपने बेचते हैं / जहीर कुरैशी
- उपालंभ में करता है--ग़ज़ल / जहीर कुरैशी
- लोग जो गुनगुनाते रहे / जहीर कुरैशी
- दिन-ब-दिन घाव गहरे हुए / जहीर कुरैशी
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