Last modified on 9 मई 2012, at 18:45

ज़माना पहले / कंस्तांतिन कवाफ़ी

अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 18:45, 9 मई 2012 का अवतरण ('{{KKRachna |रचनाकार=कंस्तांतिन कवाफ़ी |संग्रह= }} {{KKCatKavita}} <poem> इ...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

इस याद को मैं बखानना चाहूँगा...
लेकिन अब इतना झिलमिला गई है यह...शायद ही बचा है कुछ -
ज़माना पहले थी यह क्योंकि, मेरी मसें भीगने के सालों में।

एक त्वचा मानो चमेली से बनी...
अगस्त की उस शाम - क्या वह अगस्त था ? - उस शाम...
अब भी ला सकता हूँ पर याद में आँखें : नीली, मैं सोचता हूँ वे थीं...
अरे हाँ,नीली : एक नीला नीलम ।
 
अँग्रेज़ी से अनुवाद : पीयूष दईया