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ज़िन्दगी की उड़ान से हट जाएं / राज़िक़ अंसारी

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ज़िन्दगी की उड़ान से हट जाएं
हम अगर तेरे ध्यान से हट जाएं

जान जिनको अज़ीज़ है अपनी
इश्क़ के इम्तिहान से हट जाएं

मेरा वादा , लकीर पत्थर की
आप चाहें, बयान से हट जाएं

फिर ये टकराव कौन टालेगा
हम अगर दरमियान से हट जाएं

कौन ख़बरें पढे़गा देखेगा
हम अगर दास्तान से हट जाएं

हम परिंदे जो एक साथ उड़ें
ख़ुद शिकारी मचान से हट जाएं