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झंडा की बोलै छै / नंदकिशोर शर्मा

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रे नूँनूँ देखीं तेॅ झंडा की बोलै छै?
चारो दिस ताकै छै झूमैं छै डोलै छै
रे नूँनूँ देखीं तेॅ झंडा की बोलै छै?

सैंतालिस के पहले पछिया बियार बहै
शेर के बगिच्चा में गीदर सियर रहै
गोस्सा पुरनका छै देह तनि झोलै छै
रे नूँनूँ देखीं तेॅ झंडा की बोलै छै?

झंडा कै हाबा, गुदगुद्दी लगावै छै
छिटकै छै पोर-पोर नाचें इठलावै छै
सरंग में मस्त-मस्त तीन रंग घोेलै छै
रे नूँनूँ देखीं तेॅ झंडा की बोलै छै?

गाँधी के आँधी सें खम्भा उखड़लै रे
आजादी के दीया घॉर-घॉर जरलै रे
हँस्सी ठहक्का छै बंद ठोर खोलै छै
रे नूँनूँ देखीं तेॅ झंडा की बोलै छै?

चोर औ’ सिपाही में रात-दिन सल्हा भेल
काश्मीर-आसाम लालकिला हल्ला भेल
आस्तीन के साँप मूँहें टटोलै छै
रे नूँनूँ देखीं तेॅ झंडा की बोलै छै?
रे नूँनूँ देखीं तेॅ झंडा की बोलै छै?

रारे के आजादी ओकरे बहार भेल
दीप बुझल सज्जनता सौंसे अन्हार भेल
बाहर में नाम बहुत घॉर हम्मर डोलै छै
रे नूँनूँ देखीं तेॅ झंडा की बोलै छै?