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झुर्रियाँ / स्वप्निल श्रीवास्तव

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इस बूढ़ी औरत की झुर्रियाँ
बहुत ख़ूबसूरत हैं
जैसे किसी चित्रकार ने उसे अदम्य
कलात्मकता के साथ रचा हो

बोलती हैं उस की आँखें
कुछ कहते समय लय में
हिलते है होठ
उसकी आवाज़ में खनक और मिठास है
कोई सुन ले तो भूल न पाए

अपने जमाने में सुघड़ रही होगी
यह औरत
आप पूछ सकते हैं कि कैसे मैं
इस औरत के बारे में इतना
जानता हूँ

मित्रो, यह औरत हमारी माँ है