भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
© कॉपीराइट     योगदानकर्ता     कविता कोश टीम

झूठ के पाँव / अभय मौर्य

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (वार्ता | योगदान)ने किया हुवा 11:16, 14 जनवरी 2011का अवतरण

(अंतर) ← पुराना संस्करण | वर्तमान संशोधन (अंतर) | नया संशोधन → (अंतर)
यहां जाएं: भ्रमण, खोज

कहते हैं झूठ के पाँव नहीं होते ।
पर मुहावरा पलट जाता है तब
जब झूठ बोलने वाला
कोई मामूली बुढ़ऊ न होकर,
है जाने-माने, लंबे-तगड़े साठ-बरसिया
अठारह वर्ष की चुलबुली-सी बच्ची से
प्रेम लीला में डूबा ‘युवा’।
तो सवाल उठता है कि झूठ में दम है ?
ज़रूर होगा, नहीं तो क्यों नहीं आती है घिन
लाखों-करोड़ों युवाओं के रोल मॉडल की
उस बात से जो है जन-जन के लबों पर ?

अब इसमें बिचौलियों को घसीटें ?
दलाल की ‘दरिंदगी भरी’ आँखें भी
कभी-कभी चौंधियाँ जाती हैं।
पथरा जाती है वे और
राइटिंग ऑन द वॉल उन्हें
बिल्कुल नज़र नहीं आती ।
अहंकारवश दल्लों की तो याददास्त भी धूमिल हो गईः
भूल गए हैं वे कि क्या हशर हुआ था उनका
जिन्होंने चलाया था गोयबल-सा रिकार्ड तोड़ झूठ का अभियान :
कि चमक रहा है इंडिया, दमक रहा है भारत ।
दलालों को तो यह भी याद न रहा
कि लगाई थी उन्होंने सुप्रीमकोर्ट में जबरदस्त गुहार
कि टेलिफोन सीडी को जगजहिर न होने दें,
आज खुद बाँटते फिरते हैं दूसरों की सीडी सरे आम।

वैयक्तिक औज़ार
» रचनाकारों की सूची

गद्य कोश

» विभाग

» अन्य भाषाओं से

» महत्त्वपूर्ण संदेश
  • फ़िलहाल नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। कृपया अपनी रचनाएँ कोश में जोड़ने के लिए अभी आवेदन न करें। आगे की सूचना इसी जगह प्रकाशित की जाएगी।
  • कविता कोश से संबंधित हर जानकारी पाने के लिए पढ़ें: कविता कोश: हिन्दी काव्य में जुड़ता एक नया आयाम

» प्रादेशिक कविता कोश

» अन्य महत्त्वपूर्ण पन्नें

» अन्य पन्नें