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"तंगहाली अब न छोड़ेगी मुझे / हरिराज सिंह 'नूर'" के अवतरणों में अंतर

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उम्र भर यूँ ही झिंझोड़ेगी मुझे।
  
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चैन से कब रहने देगी ज़िन्दगी?
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आख़िरी दम तक निचोड़ेगी मुझे।
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पत्थरों को मारकर बदक़िस्मती,
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आइनों की तरह तोड़ेगी मुझे।
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दर-ब-दर भटका के मेरी ज़िन्दगी,
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अब हवा किस सम्त मोड़ेगी मुझे।
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तोड़ कर उम्मीद का कच्चा मकां,
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सब्र से वो ‘नूर’ जोड़ेगी मुझे।
 
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22:23, 17 अक्टूबर 2019 का अवतरण

तंगहाली अब न छोड़ेगी मुझे,
उम्र भर यूँ ही झिंझोड़ेगी मुझे।

चैन से कब रहने देगी ज़िन्दगी?
आख़िरी दम तक निचोड़ेगी मुझे।

पत्थरों को मारकर बदक़िस्मती,
आइनों की तरह तोड़ेगी मुझे।

दर-ब-दर भटका के मेरी ज़िन्दगी,
अब हवा किस सम्त मोड़ेगी मुझे।

तोड़ कर उम्मीद का कच्चा मकां,
सब्र से वो ‘नूर’ जोड़ेगी मुझे।