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तिमीलाई नदेख्दा यस्तो लाग्छ, प्रत्येक क्षण देखेझैँ / सरुभक्त

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तिमीलाई नदेख्दा यस्तो लाग्छ, प्रत्येक क्षण देखेझैँ
मनको अनन्त पानीभरि प्रेमपत्र सधैँ लेखेझैँ
झरीका बादलहरू कति आए अनि कति गए
हिमालझैँ ठडिई मनका विषादहरू सबै छेकेझैँ।