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तुलसीदास के दोहे / तुलसीदास

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अनहोनी होनी नही, होनी हो सो होए!!
 
 
नीच निचाई नही तजई, सज्जनहू के संग!
 
तुलसी चंदन बिटप बसि, बिनु बिष भय न भुजंग !!
 
 
ब्रह्मज्ञान बिनु नारि नर कहहीं न दूसरी बात!
 
कौड़ी लागी लोभ बस करहिं बिप्र गुर बात !!
 
 
फोरहीं सिल लोढा, सदन लागें अदुक पहार !
 
कायर, क्रूर , कपूत, कलि घर घर सहस अहार !!
 
 
तुलसी पावस के समय धरी कोकिलन मौन!
 
अब तो दादुर बोलिहं हमें पूछिह कौन!!
 
 
मनि मानेक महेंगे किए सहेंगे तृण, जल, नाज!
 
तुलसी एते जानिए राम गरीब नेवाज!!
 
 
होई भले के अनभलो,होई दानी के सूम!
 
होई कपूत सपूत के ज्यों पावक मैं धूम!!
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