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त्यरि म्यरि च जोड़ी / केशव ध्यानी

त्यरि म्यरि च जोड़ी कैमा न बिंगै[1] दे,
सौंजङ्[2] यौं कि छ्वीं[3] छन तू छ्वीं न लगै दे।
इनी छ्वीं लंगौणू मन बोद भारी,
बिस बणलो अमरित स्वी-सै न करै दे।
कैका दिख्याँ मी पर न मारी तु गारी,
मी जनई पँथेरम् पाणी न खले दे।
धौडाँदि द्वफरी[4] मा बँशुली बजौलो,
तू मोरि बटि भैने कु मुक न पल दे।
कमि आँखि टलपल रर्ग्याट करली,
क्वी पूँछलो आँसू आँख्यौं मा लुकै दे।

त्यरिइ तरौं भलि स्वाणि[5] छन तेरि डाँडी,
ज्यू झुरैकी तौकी शोभा न जगै दे।

शब्दार्थ
  1. समझना
  2. सहेलियाँ
  3. बातें
  4. दुपहर
  5. सुन्दर