भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
थके मजदूर रह-रह कर... / ओमप्रकाश यती
Kavita Kosh से
| मुखपृष्ठ » | रचनाकारों की सूची » | रचनाकार: ओमप्रकाश यती |
थके मज़दूर रह-रह कर जुगत ऐसी लगाते हैं
कभी खैनी बनाते हैं कभी बीड़ी लगाते हैं
जहाँ नदियों का पानी छूने लायक़ भी नहीं लगता
हमारी आस्था है हम वहाँ डुबकी लगाते हैं
ज़रूरतमंद को दो पल कभी देना नहीं चाहा
भले हम मन्दिरों में लाइनें लम्बी लगाते हैं
यहाँ पर कुर्सियाँ बाक़ायदा नीलाम होती हैं
चलो कुछ और बढ़कर बोलियाँ हम भी लगाते हैं
नहीं नफ़रत को फलने-फूलने से रोकता कोई
यहाँ तो प्रेम पर ही लोग पाबन्दी लगाते हैं