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दिसावर जा / रामस्वरूप किसान

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खेत बिचाळै ऊभी
बांकळी जांटी
हाथ पकड़ै

बांठां में चरतौ ऊंट
गेलौ रोकै
लांडकी भैंस
ठाण फोड़ै

अणमणौं बापू
बाखळ में गेड़ा काटै

आंख्यां पूंछती मां
समान बांधै

सगळां रौ मन कैवै
ना जा, ना जा
थूं एक ई तो है
इण घर रो च्यानणौं

पण पेट कैवै
सगळां रा पेट
जा, जा
बेगौ जा
दिसावर जा।