भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
© कॉपीराइट योगदानकर्ता कविता कोश टीम

दो-चार गाम / निदा फ़ाज़ली

Kavita Kosh से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज

दो-चार गाम राह को

हमवार देखना

फिर हर क़दम पे इक नयी

दीवार देखना |


आँखों की रौशनी से है

हर संग आइना

हर आईने में खुद को

गुनाहगार देखना |


हर आदमी में होते हैं

दस-बीस आदमी

जिसको भी देखना हो

कई बार देखना |


मैदाँ की हार-जीत तो

क़िस्मत की बात है

टूटी है जिसके हाथ में

तलवार देखना |


दरिया के उस किनारे

सितारे भी फूल भी

दरिया चढ़ा हुआ हो तो

उस पार देखना |


अच्छी नहीं है शहर के

रस्तों की दोस्ती

आँगन में फैल जाए न

बाज़ार देखना.....!

वैयक्तिक औज़ार
» रचनाकारों की सूची

गद्य कोश

» हिन्दी में अनुवाद

» विभाग

» भाषाएँ और भी

» महत्त्वपूर्ण संदेश
  • फ़िलहाल नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। कृपया अपनी रचनाएँ कोश में जोड़ने के लिए अभी आवेदन न करें। आगे की सूचना इसी जगह प्रकाशित की जाएगी।
  • कविता कोश से संबंधित हर जानकारी पाने के लिए पढ़ें: कविता कोश: हिन्दी काव्य में जुड़ता एक नया आयाम

» प्रादेशिक कविता कोश

» अन्य महत्त्वपूर्ण पन्नें

» अन्य पन्नें