भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

दो ही तो वर्ग हैं / राजूरंजन प्रसाद

Kavita Kosh से
योगेंद्र कृष्णा (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 00:16, 2 अगस्त 2011 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=राजूरंजन प्रसाद |संग्रह= }} <poem> ठीक ही कहते हैं अशो…)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ठीक ही कहते हैं अशोक जी
दो ही तो वर्ग हैं
आदमी के
इस भरी – पूरी दुनिया में
एक है सुविधाभोगी
और दूसरा है भुक्तभोगी
बताइए कि
किस वर्ग में
शामिल हैं आप
पूछता है -
हमारे कसबे का कवि
(21 .10. 2010)