भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

धूप लिक्खूँ या कहकशाँ लिक्खूँ / ज्ञान प्रकाश विवेक

Kavita Kosh से
द्विजेन्द्र द्विज (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 07:45, 5 नवम्बर 2009 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=ज्ञान प्रकाश विवेक |संग्रह=आंखों में आसमान / ज्ञ…)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

धूप लिक्खूँ या कहकशाँ लिक्खूँ
तेरे हातों पे आसमाँ लिक्खूँ

तेरी आँखें अगर इजाज़त दें
उनमें सपनों की ठुमरियाँ लिक्खूँ

अपनी ख़ुशियों के कोरे काग़ज़ पर
तेरे अश्कों का तरजुमाँ लिक्खूँ
  
रेत पर चाँद पर कि लहरों पर
नाम तेरा कहाँ-कहाँ लिक्खूँ

रास्ता हूँ कि नक्श हैं लाखों
किस मुसाफ़िर की दास्ताँ लिक्खूँ

तुझको दे दूँ मिलन की उम्मीदें
अपने हिस्से में दूरियाँ लिक्खूँ