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"नयन हँसे / कविता भट्ट" के अवतरणों में अंतर

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अहो! कर्त्तव्य !
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विराग में खड़ा है-
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'''अधिकार- मुस्काए'''
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सिंहासन विराजे।
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02:35, 17 अगस्त 2019 के समय का अवतरण

नयन हँसे
थे बीतराग कल
यों बँधे आलिंगन,
पिय नैनों ने
दिया जीवन -दान
करूँ अमृतपान।
2
अहो! कर्त्तव्य !
विराग में खड़ा है-
मूक ,जड़,बधिर,
मद में चूर
अधिकार- मुस्काए
सिंहासन विराजे।