भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नल / श्रीनाथ सिंह

Kavita Kosh से
Dhirendra Asthana (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 16:15, 5 अप्रैल 2015 का अवतरण ('{{KKRachna |रचनाकार=श्रीनाथ सिंह |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KKCatBaalKavita...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आया, आया, आया नल,
भर लो, भर लो! भर लो जल।
कान नदी का काटा इसने,
दिया ताल को घाटा इसने,
और कुओं को पाटा इसने,
ओहो यह है बड़ा प्रबल।
भर लो ,भर लो , भर लो जल।
यहाँ मगर का नाम नहीं है,
कछुओं का कुछ काम नहीं है,
तेज हवा या घाम नहीं है,
केवल जल है जल केवल,
कैद हो गया क्या बादल?